घोटाला है भाई घोटाला !

घोटाला है भाई घोटाला ! ये नारा कोइ मजाक तो नही । नागरिकों की खून पसीने की कमाई की लूट है, वो मजाक कैसे हो सकता है । लेकिन न्यायतंत्र इसे मजाक में लेता है । छोटा चोर चोरी करता है तो पकडेजाने पर चोरी का माल पूरा रिकवर किया जाता है और जीसका माल … Continue reading

सरदार की आम की टोकरी

दोनों विश्वयुध्ध के दौरान विश्व की जनता का असंतोष, गुस्सा बढते देख बेंकर माफिया यहुदियों ने दुनिया पर राज करने का अपना पैंतरा बदला । उन के प्यादे अंग्रेज, डच, फ्रेंच जहां भी गुलाम देशों में राज करते वो सब देशों की जनता के लिये दुश्मन बन गये थे । उन को वापस खिंच लिया … Continue reading

आतंकवादी बेन्कर्स रूस में

दोस्तो, जुठ बोलने की आदतवाले इतिहासकार हमे क्या क्या जुठ बताते रहते हैं उस की कोइ सीमा नही है । जो पढाया गया वो भी इतिहास ही था और जो लिख रहा हुं ये भी इतिहास ही है, पढनेवाले की विवेकबुध्धि पर है वो किस तरह लेते हैं । हमे बताया गया की रसियन क्रान्ति … Continue reading

आज का कर्ण गार्डी साहब

गरीबों की असली बेन्क दिपचन्दभाई गार्डी अब नही रहे, उनको को मेरा नमन और हार्दिक श्रध्धांजली । ————————————————————————– पहले हररोज का एक एक लाख दान करने का नियम था । आज की तारीख में मेहंगाई बढ जाने की वजह से हररोज एक करोड का दान देने का नियम बनाना पडा । उनकी बनाई स्कूलें और … Continue reading

क्यों मजाक करते हो साहब, इस गरीब की !

सालों से हम सुनते आये हैं गरीबी हटाओ ! गरीबी ह्टाओ !! क्या हम बेवकुफ है ? नही । हम जानते हैं गरीबों की कितनी डिमान्ड है । सब जगह गरीब चाहिए, सब को जरूरत है ईन की । ईसे कौन हटाना चाहेगा ? कुछ महिने पहले लोग मेरे एक दोस्त पद्मनाभ के पिछे पड … Continue reading

सुअर की औलाद

सुअर की औलाद क्यों लिखा ?  बचपन से ही धर्मेन्द्र मेरे आदर्ष हिरो रहे हैं । गुन्डों के साथ लडते समय उनको गुस्सा आता था तो ऐसा कुछ बोलते थे, मुझे खाली याद ही है जीवनमें नही उतारा है । फिर भी ऐसा लिखना पडा । आप को भी समज में आ जायेगा कि क्यों … Continue reading

मनी गेम

कुछ विषय ऐसे हैं जो दिमाग पर कब्जा कर लेते हैं, पैसे का विषय उन में से एक है । ये मानव जात की भावनाओं से जुड गया है क्यों की मनव के लिए पैसे ही सारी समस्या का उपाय है । और पैसा ही सारी समस्या खडी करता है । समस्या खडी इस लिए … Continue reading

कहानी चिंटी और टिड्डी की

2500 साल पहले ग्रीस में बसे एक गुलाम हिन्दु एसोप ने बहुत सी दंत कथा लिखी थी, वो बहुत अच्छा स्टोरी टेलर था, वो सब कहानीयां एसोपिया में आज उपलब्ध है । उस में चिंटी और टिड्डी की कहानी बडी मशहूर है । कडी धुप में काम करती चिंटी पर हंसते हुए टिड्डी ने कहा … Continue reading

श्रध्धा अंधश्रध्धा

विश्वास कुदरतने दी हुई एक भावना है । लगभग हर प्राणी में है । विश्वास से प्राणी कुछ पा लेता है या पाने की कोशीश करता है, विश्वास नही रखने से या अविश्वास से अपनी जान बचाता है । बच्चा दूर से अपनी मां को देख कर रोता है या उस के पास जाने के … Continue reading

आदमी आदमी है या चिकन ?

अगस्त १९२९ का गर्मि का दिन था । रसिया के एक उजडे हुए रण प्रदेश के विशाल खुले मैदान में कोंग्रेस ओफ सोविएत कोम्युनिस्ट पार्टी का अधिवेशन था । रसिया के हर प्रदेश से आये डेलिगेट पार्टी चीफ कोमरेड जोसेफ विस्सेरिओनोविच स्टेलिन की राह देखते थे, आज समाजवाद के पाठ सिखने थे । आखिर दोपहर … Continue reading