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धरती-पुत्र

एक पात्र की रचना की है “धरती-पुत्र” । धरती-पुत्र की अपनी ही अलग सोच है, ईसी वजह से परेशान रहता है । दूसरे लोगों के साथ मिल जुल के रहने में परेशानी होती है । दुसरे ईसे पागल समजते हैं और ये दुसरों को । अपने नाम से ही उसे एतराज है, कहता है “ … Continue reading