महिला दिन या महिला रात ?

  कल महिलाओं का खास दिन था तो मोदी ने महिलाओं को चाय पिलाई । हम कडवी दवाई पिलाते हैं ।

पहले तो देश में महिला के विरुध्ध होते गुनाह देखो । २००१ और २०११ बीच के १० साल के डेटा है । सब से बदमाश जनता जीन राज्य में रहती है उस टोपटेन १० राज्य के डेटा है । जो आंकडे हैं वो हर एक लाख आबादी में होते क्राईम के आंकडे है ।

 महिला विरुध्ध टोटल क्राईम रेट में टोपटेन राज्य ।

(१) केरला, (२) दिल्ली, (३) आसाम, (४) काश्मीरा,(५) त्रिपूरा, (६) बंगाल, (७) बिहार, (८) मणीपूर, (९) सिक्कीम, (१०) मेघालय ।

क्राईम में ये सब राज्य क्यों आगे हैं ?

इन सभी राज्यों में हिन्दुत्व खतम या कमजोर कर दिया है और जो हिन्दु बचे भी है उन में दानवों का चलाया हुआ शैतानी धर्म सेक्युलर धर्म चलाया गया है । अपने पूरखों के संस्कार भूला दिये हैं । इन मे से किसी राज्य में भारत को भारत एक राष्ट्र मानने वाली एक भी राष्ट्रवादी सरकार नही है । दानव समाज के प्यादे ही राज्य कर रहे हैं जो भारत को “न्यु वर्ल्ड ओर्डर” के तहत युनो के बेन्कर माफियाओं के हवाले करना चाहते हैं । स्वराज के नारे से जैसे ही अन्ना टीम या “आप” पार्टी और भारत के सारे माओवादी नक्षली माहोल खडा कर देन्गे, अराजकता फैलायेन्गे, प्रथम तो ये सभी राज्य अपना अपना भारत से अलग होने का एजन्डा चला देन्गे । 

  पूरे भारत की बात करें तो ये दोगले दानव समाजी जनता को उल्लु बनाते हुए नारी सशक्तिकरण की बात करते हैं, कडे कानून भी बनाते हैं, दूसरी साईड कानून का पालन नही करते, कानून का हथियार उठाते हैं तो भी खास आदमी को टार्गेट करने के लिए, धर्म को हटाते हैं, धर्म के रखवालों को प्रताडित करते हैं, स्वतंत्रता की दुहाई देकर नग्नता को प्रोत्साहित करते हैं और प्रसारित करवाते हैं । फिल्म टीवी, मेगेजीन, न्युज पोर्टल, मिडिया के हर अंग से नग्नता टपकती है, हर अंग नंगा हो चुका है । फिल्मी जगत पर साम्यवादियों का कबजा तो पहले से ही था सेन्सरबोर्ड का कबजा भी कर लिया है । कितनी भी देश विरोधी, धर्म विरोधी बातों को पास कर देते हैं, नग्नता तो दिखती ही नही सेन्सर बोर्ड को । कम था तो सनी लियोन जैसी आंरतराष्ट्रिय पोर्न स्टार को भी बूला लिया है जीस से भारत में भी भारतिय पोर्न स्टारों को पैदा किया जा सके ।

फेशन चला के नारी को नरपशु के आगे एक चारे के रूप में पेश कर रहे हैं और बात कर रहे हैं नारी को बचाने की । बात कर रहे हैं नारी दिन की और काम कर रहे हैं नारी को काली रात के लिए सजाने की । फिर बलात्कार ना हो तो क्या हो !

आदमी कितना भी पढ ले आखीर वो प्राणी ही है । धर्मों ने उसे प्राणी में से इन्सान बनाया था । धर्म नारी को ढंकने की कोशीश करता था जीस से नारी को पुरुष की खराब निगाह से बचाया जा सके । दानव समाज नारी को खुला कर रहा है और मानव को वापस प्राणी बना देना चाहता है । बुध्धिजीवीयों को वहम हो गया है कि हम पढ लिख गये हैं तो हम अपने आप ही इन्सान हो गये हैं, हम को धर्मों से उधार की नैतिकता की जरूरत नही है । सब से बडे क्राईम तो पढे लिखोंने ही किए है अनपढ तो जेब कतरा ही बन सका है । शरीफ बुध्धिजीवीयों को मालुम नही समाज और उन के खूद के माबाप की नैतिकता की विरासत उनको मिली है तभी शराफत दिखा रहे हैं, उन की आनेवाली पिढी में वो विरासत भी खतम हो जायेगी ।  

नारीवाद, नारी सशक्तिकरण युनों के दानव यहुदियों का उठाया हुआ समाज को तोडने का हथौडा है । मानव जात को संपूर्ण गुलाम बनाने के लिए मानव को पशु तुल्य बनाना जरूरी है । ( पूरा जानिये लिन्क “सुअर की औलाद”) मानव को पशु बनाने के लिए मानव जात को कमजोर बनाना, मानव की आबादी घटाना जरूरी हो गया है । शादी प्रथा, कुटुम्ब प्रथा तोडने से मानव जात अपने आप कमजोर पड जाती है और आबादी घटाने का भी मकसद पूरा होता है । पुरुष तो पागल होते हैं अब महिलाओं को भी पागल कर देना है जीस से महिला और पूरुष का आपस में साथ रहना मुश्किल हो जाये । शादी तोडने के कानून आसान और नारी के पक्ष में कर दिये हैं और कानून में पुरुष को लूटने के ही प्रावधान है । जैसे जैसे नारियों को दबंग बनाया जायेगा पुरुष पक्षपाती कानून के कारण शादी से ही डर जाएन्गे ।

दानव समाज मानव समाज को तोडने के लिए कितनी मेहनत करता है उस के कुछ उदाहरण ।

ईस फोटो के साथ लगे समाचार पढोगे तो मालुम हो जायेगा की दुनिया में सब से कथित बुध्धिजीवी अमरिका और उस में भी सब से बडे बुध्धिजीवी अमरिकन न्यायधिश ने एक आदेश दिया है की महिलाओं के असहज हालत में फोटो खींचना गुनाह नही है । एक तरिके से वो राक्षस जज ने यह इशारा कर दिया है की महिलाओं के पास प्रावेट छुपाने जैसा कुछ भी नही है, जो है वो पलिक करो उस में कोइ गुनाह नही है ।

एक चर्च के राक्षसी फाधर ने कह दिया है चर्च में आओ तो कपडे उतार दो । बिना कपडे से गॉड को प्रार्थना करो तो गोड पूरी तरह शरीर में उतर सकता है । उस से थोडे शरीफ फाधरने कहा महिलाएं अंडर गार्मेन्ट पहन के चर्च में ना आये । पकडी गई तो दंडित होंगी ।

एक दलाल विज्ञानिक को खडा किया । उस ने बहुत गहरी खोज की और ढुंढ निकाला कि पति पत्नि के आपस के रिश्तों में खटास आ जाती हैं क्यों कि एक दुसरे के लिए मालिकी भाव आ जाता है, मेरी पत्नि या मेरा पति । रात दिन असलामति अनुभव करते हैं, शक करते हैं कि मेरा जीवन साथी कहीं बेवफा तो नही ! उसने सुजाव दिया की मालिकी भाव छोडो, मित्रों में आपस में एक दुसरे के पति पत्नियों के साथा यौन संबंध बनाओ, पतिपत्नि में विश्वास बढेगा, आनंद और सुख शांति से जीने की नयी राह मिल जायेगी ।

ये शुर्पनखा ब्रिटन में लेबर पार्टिकी टोनी ब्लेर सरकार में मंत्री रह चुकी है । सेक्स के लिए उमर घटाने के विषय में बोली, १० साल के बच्चों के साथ संबंध बनाने की छुट होनी चाहिए । वो खूद अपने जीवन में यही धन्धा करती आयी है, अपनी उमर से आधी उमर के पुरुषों के साथ लीवइन और रख्खो और भगाओ जैसे संबंध बना कर जीती आयी है । कल्पना करो इस मंत्री ने अपने कार्यकाल में ब्रिटिश नागरिकों के जीवन के साथ कैसे मंत्र मारे होंगे ।

आखिर यौन संबंध के लिए उमर क्यों घटानी है ? सेक्स एज्युकेशन के समय टिचर या सहपाठी से सेक्स के खेल होने लगे तो उमर के कारण कोइ कानून के लफडे में ना फंसे । ( पूरा जानिये लिन्क “सेक्स से मानब भक्षण तक”)

नारियों को दबंग बनाने के लिए दाववों ने अनेक रियालीटी शो चला रख्खे हैं । मनोरंजन जगत में नारियों को छल कपट और कुटुंब में झगडे सिखाये जात हैं । शराब आदी व्यसन सिखाये जाते हैं । रियालिटी शो खाली टीवी में आते हैं ऐसा नही है, रियल लाईफ में भी होते हैं ।

रसिया में तीन महिलाने “पुसी रायट” नाम का एक संगीत ग्रूप बनाया है । गंदे गीतों के साथ धरना प्रदर्शन । असभ्य गाने के साथ पूटीन का विरोध करना मकसद था । एक बार हलकट नखरें करती चर्च में घुस गई और वर्जीन मेरी को पूटिन को हटाने की मांग करते गीत गाने और संगीत बजाने लगी । दानवों के मिडिया कवरेज के कारण पूरी दुनिया के युवाओं में लोकप्रिय हो गई । जेल में डाली गई थी पर मानव हक्क और नारीवादियों के दबाव के कारण छुट गयी है ।

पुसी धरना प्रदर्शन के बाद वजाइना हक्क के लिए दुनिया भर में प्रदर्शनी हो रही है । सामाजने वजायना के हक्क पर बंदिशें डाली थी और बहुत से भ्रम बना कर नारियों को छला था वो भ्रम दूर करना है । दानव समाज चाहता है की नारी भूल जाये कि वो एक मां है, एक बहन है, एक पत्नि है । ये सब धर्म वालों के फैलाये भ्रम है । 

ये फोटो बीजिंग की एक विद्यार्थिनी की है । निचे की लिन्क में ऐसी सत्रह लडकियां मिलेगी । तस्विर दानव समुह के क्लब  ‘जेंडर एक्टिविज्म क्लब’ द्वारा चलाए जा रहे ‘द माई वेजिना सेज’ (मेरी योनि कहती है) नाम का अभियान चलाया है उस मौके की है । सब लडकियों के हाथ में बोर्ड है और उस में मेसेज लिखे हैं । बिलकुल पूरी समाज व्यवस्था को बिखीर ने वाले सुत्र लिखें हैं उसे यहां शेर करने में भी बडी हिम्मत करनी पडी है । 

‘मेरी योनि कहती है : वह चाहती है कि उसे सुना जाए, देखा जाए और उसकी पहचान हो।’

‘मेरी योनि कहती है : प्यार को बहाने के तौर पर इस्तेमाल मत कीजिए।’

‘मेरी योनि कहती है : मैं आजादी चाहती हूं।’

‘मेरी योनि कहती है : कौमार्य सिर्फ एक बकवास है।’

‘मेरी योनि कहती है : मैं नखरेबाज हो सकती हूं, लेकिन आप मेरा फायदा नहीं उठा सकते।’

‘मेरी योनि कहती है : मैं उसे ही अपने नजदीक आने की इजाजत दूंगी, जिसे मैं चाहूंगी।’

‘मेरी योनि कहती है : व्यापार के लिए स्वतंत्र।’

‘मेरी योनि कहती है : मैं सम्मान चाहती हूं।’

‘मेरी योनि कहती है : मेरी भी इच्छाएं और मर्जी है।’

‘मेरी योनि कहती है : वह केवल मुझे सुनती है।’

 http://www.bhaskar.com/article/INT-my-vagina-says-activity-to-promote-feminism-in-china-4429822-PHO.html?seq=1

ये रियल लाईफ रियालीटी शो है । दो लेस्बियन महिलाएं शादी करने के लिए कानून की आंख में धूल डालते हुए एक ने हार्मोन्स की दवाई से अपने शारीर को दिखने में पूरुष जैसा बना लिया । दाढी मुछ आ गई, छाती बैठ गयी या कटवा दी पर गर्भाशय और जननांग सलामत रहे । शादी के बाद बाहरी सोर्स से गर्भवति बन के दो तिन बच्चे पैदा किए । और मिडिया में ढोल पिटा गया की देखो, अब बच्चे पैदा करना महिलाओं का ही ठेका नही है, पुरुष भी बच्चे पैदा कर सकते हैं । उस कपल को पब्लिसीटी और डोलर मिल गये तो बाद में तो लाईन लग गई ।

बाद में जीतने भी पुरुष खडे हो गये हैं वो पुरुष नही पर महिलाओं के जननांग वाले ट्रांन्स जेन्डर है । जीनेटिक खामी के कारण ऐसा होता है । इस से उल्टा भी होता है, महिला के शारीर के साथ पुरुष का जननांग बाले ट्रांन्स जेन्डर भी होते है ।

टीवी, आदमी के बाद अब एक पूरा देश भी रियालीटी शो हो सकता है मुझे आज मालुम पडा । युनो के धनपतियों ने दुनिया भर की महिलाओं को किस हद तक दबंग बनना है वो बात समजाने के लिए एक छोटासा देश बनाया है ।

दैनिक भास्कर का समाचार है ।

इस दुनिया में एक ऐसा भी देश है, जहां पुरुष सिर्फ महिलाओं की गुलामी करते हैं। उन्हें जानवरों के समान समझा जाता है। उनसे मनचाहा काम कराया जा सकता है। ‘वुमन ओवर मेन’ मोटो वाले इस देश का शासन भी महिला के हाथ में है। यह देश ‘अदर वर्ल्ड किंगडम’ है, जो 1996 में यूरोपियन देश चेक रिपब्लिक से बना था। इस देश की रानी पैट्रिसिया-1 है, जिसका यहां एकछत्र राज चलता है। हालांकि, इसे अन्य राष्ट्रों ने देश का दर्जा नहीं दिया है। इस देश की राजधानी ब्लैक सिटी है।

 चेक रिपब्लिक में स्थित इस देश का अपना झंडा, करेंसी, पासपोर्ट और पुलिस फोर्स है। यहां की मूल नागरिक सिर्फ महिलाएं हैं। यहां पुरुषों को जानवर ही समझा जाता है। पुरुष गुलामों से ऊपर कुछ भी नहीं माने जाते हैं। इस देश के निर्माण में दो मिलियन डॉलर की लागत आई थी।

महारानी पैट्रिसिया-1 को ही देश के कानून में परिवर्तन करने का अधिकार है। उन्होंने इस देश की नागरिकता के लिए कुछ नियम बनाए हैं।

– कोई भी अपनी सहमति से संबंध बनाने की उम्र तक पहुंच गई हो।

– उसके पास कम से कम एक पुरुष नौकर होना चाहिए।

– अदर वर्ल्ड किंगडम के सभी नियमों का पालन करने वाली होनी चाहिए।

– नागरिकता के लिए आवेदन दे।

– महिला को कम से कम पांच दिन महारानी के महल में बिताने होंगे।

 क्या सुविधाएं हैं…

तीन हेक्टयर यानी 7.4 एकड़ की भूमि पर बने देश में कई इमारते हैं। 250 मीटर का ओवल ट्रैक, छोटी झील और घास के मैदान हैं। यहां मुख्य इमारत महारानी का महल है। यहीं से पूरे देश का शासन चलता है। यहां दावत हॉल, लाइब्रेरी, दरबार, यातना गृह, स्कूल रूम, जिम, कैदियों को रखने वाले जेल तहखाने हैं। इसके यहां स्विमिंग पूल, रेस्टोरेंट, वांडा नाइटक्लब भी है।

कामरूप देश की याद दिला दी जो ९००-१००० साल पहले ब्रह्मदेश को कहा जाता था । यकिन हो गया की वो भी इन यहुदियों के भारतिय प्यादों का कमाल था, जुठी कहानी बनाई गयी थी ।

इस रियालिटी शो वाले देश में रानी से लेकर सभी नागरीक युएन के पेइड मेसनिक एक्टर्स है । मजा का मजा और डोलर्स के डोलर्स !

उस देश में महिलाएं पुरुष के साथ क्या करती है सभी फोटो देखीए । याद रखिये वो सब नाटक है असल नही है ।

http://www.divyabhaskar.co.in/article-hf/INT-womens-day-2014-other-world-kingdom-4544276-PHO.html?seq=1

दानवों के रोकने के कुछ उपाय ।

–फिल्म के सेन्सर बोर्ड में से साम्यवादियों की टांगें खिंच कर बाहर करना होगा और उस की जगह राष्ट्रवादी हिन्दु मुस्लिम विद्वानो को बैठाना होगा ।

–टीवी को भी सेन्सर बोर्ड के निचे लाना होगा और कोइ अभिव्यक्ति की आजादी की बात कर तो तुरंत ही उसे ठोकना होगा ।

–नंगे मेगेजीन और पेपरों को जलाना होगा, गंदे न्युज पोर्टल वालों की ओफिस में हल्लाबोल करना होगा ।

–सरकार को पोर्नसाईट ब्लोक कराने के लिए मजबूर करना होगा ।

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