शेइम शेइम, कुछ तो शरम करो !

जब बच्चे चड्डी नही पहनने की जिद करते हैं तो माबाप या बडे भाई बहन “शेइम शेइम” बोलते हैं तो बच्चा चडी पहन लेता है । बच्चों में इतनी तो शरम होती है, बडे शरम छोड रहे हैं । 

मानवता के दुश्मनों ने दुनिया में “शैइमलेस सोसाईएटी” बनाने की ठानी हुई है, प्रजा को “शेइम शेइम” बना देना है इस बच्चे की तरह । आदमी की शरम, लिहाज छुडाने के लिए कई तरिके एक साथ काम में लगाये हैं । प्राणी की ही टोली होती है ऐसा नही है, साधनो की भी टोली होती है । मिडिया – आप कोइ भी माध्यम देखो टीवी, सिनेमा, समाचार की साईट खोलते ही दो चार शेइम शेइम आर्टिकल नजर आ ही जाते हैं , नेताओं की प्रेरणा – क्या नेताओं की धोती इतनी ढीली होती जा रही है, कला के सभी रूप, साहित्य और सबसे बडा साधन है धर्म और राजनीति । ये रही सारे साधनों की टोली, बच्चों के रूप में ।

 

इन बच्चों के संकेतों पर मत जाईए । लेकिन ऐसे ही संकेत मानवता के दुश्मनो ने भी खोज लिए हैं । ये खास संकेत होते हैं, संकेत बता रहे हैं आप को क्या होना है । ये संकेत है मेसोनिक और थियोसोफिस्ट शैतानों के । हालां की ये संकेत तो मानवीओं के जन्म के साथ ही शुरु हो गये थे, शब्द नही थे, इशारों में बातें होती थी । फिर गुंगे बहरों को ये अच्छा काम में आया, ये एक भाषा ही है जो हर देश में अलग अलग है । लेकिन हेलन किलर नाम की गुंगी बहरी और अंधी महिला ने थियोसोफिस्टों के आपसी परिचय के लिए इस का एक खास स्वरूप दिया । दूसरा कोई इसे नही समज सकता । हेलन खूद एक समाज सेवी एक्टिविस्ट थी, उस की टीचर थियोसोफिस्ट थी तो खूद भी थियोसोफिस्ट बन गई थी ।

  सिर्फ शारीरिक नग्नता की बात नही है, आदमी की हर अभिव्यक्ति से नग्नता टपकती है । बेशर्म होकर भ्रष्टाचार या चोरी करना नंगापन है, ऐसे काम नंगे लोग करते हैं । जुठे बयान नंगे नेता करते हैं, जनता की हालत और गरीबी का मजाक नंगे प्लानिंग कमीशन वाले करते हैं । धर्म को भी नही छोडा, हर दो चार महिने में एक नंगा खडा हो जाता है और धर्म का एक टुकडा ले के चलता बनता है । ये टुकडा मेरा, ये धर्म मेरा, इतने भक्त मेरे । और भक्तों की नंगाई को भी क्या कहें ? सब भगवानों के बाप महादेव को छोड विधर्मियों की कबर की भी खाक छानने लगते हैं, जैसे मुह में लड्डु आ जायेगा ! जो अपने घर्म का वफादार नही वो नंगा नही तो क्या है !

 ऐसा व्यापक नंगापन क्यो और कैसे फैलाया गया जान लिजीए ।

 १८४७ में हेलेना पेत्रोव्ना नाम की एक १६ साल की रसियन लडकी को रसिया के राज कुमार से प्यार हो गया, उस के दादा राजा के पास नौकरी करते थे । एक साल प्यार का खेल चला । बचपन से मां का साया नही था तो ये लडकी विद्रोही और आजाद खायाल की हो गई थी । एक साल बाद जब राजकुमार मर गया तो इधर उधर मुह मारने लगी तो उस की आयाने ताना मारा की “तूझे तो अब कोइ बुढा भी नही ले जायेगा” । उस लडकी ने अपनी आया को जुठा साबित करने के खातिर १७ साल की आयु में ४२ साल के बुढे नाइसफोर ब्लॅवत्स्की से शादी कर ली । तिन महिने में ही अपने पति को छोड कर भाग गई । १८४८-१८५८ के दौरान उसका जीवन आवारा की तरह बीता । ज्यादातर तिबेटमें एक लामा के पास रही । आत्मा परमात्मा, और तंत्र मंत्र और काली विध्या सिखती रही ।

 जब वो रसिया लौटी तो अपने पति के पास एक शर्त पर रहने लगी की उस का पति यथा संभव उस से दूर ही रहे । अपनी आध्यात्मिक प्रवृत्ति के कारण उसे एक एस्टोनिया के व्यापारी निकोलस मेयेन्द्रोफ से संबंध हो गया । निकोलसने अपने एक दोस्त को मना लिया की वो अपना घर उन के मिलन स्थान की तरह उपयोग करने दे । हेलेना से अपने पति से तलाक ले कर शादी करने की मांग भी रख्खी । 1861 में ६० साल का मेत्रोविच युरोप से लौट आया । हेलिना को पहले से ही जानता था । अब इस उमर में वो हेलिना को पाना चाहता था । हेलिना एक साथ तीन तीन पुरुषों को संभालने लगी । प्रेग्नन्ट हो गई तो स्कॅन्डल से बचने और बच्चा पैदा करने के लिए वो ओजुर्गेटी चली गई । अपंग बच्चा हुआ और ५ साल में वो मर गया, इन सालों वो वहीं पर रही ।

 घर जाने का रास्ता बंद कर चुकी थी । मेत्रोविच के साथ पेरिस गई । पेरिस में कुछ कर न पाने की वजह से इजिप्त जाने के लिए शीप में बैठे । शीप में हुई दुर्घटना में मेत्रोविच मर गया । ग्रीक सरकार के फंड पर उसे एलेक्जांड्रिया छोड दिया गया । वहां उस के साथी की अंतिम क्रिया कर के आगे इजिप्त के केरो पहुंच गई । वहां एक साथी मिल गई जो आफ्रिकी गुढ और काली विध्या की जानकार थी । कुछ समय इन जोडी ने साथमें काम किया । उसने सुना की अमरिका में अच्छे चान्स है, वो नकली हिन्दु नाम दे कर शीप में बैठ गई । रसियन लोगों को जासुस समजा जाता था अमरिका जाने में परेशानी खडी हो सकती थी ।

 १८७३ में न्युयोर्क पहुंच गई । सिंगल महिलाओं की होस्टेल में रह कर कपडे की फेक्टरी में काम करने लगी ।

उसकी जीन्दगी में तभी मोड आया जब उसने १४ ओक्टोबर १८७४ में हेनरी स्टील ओल्कोट का लेख पढा । वो ओल्कोट के पास पहुंच गई । दस दिन तक अपनी आध्यात्म की जादुई टेक्निक बताती रही । ओल्कोट आध्यात्मवादी नही था उसे आध्यात्म से कोइ घटना घटती है उसे देखने समजने में रूची रखता था ।

 आत्माओं को बुलाना, जादू, आफ्रिकन आध्यात्म, बौध्ध आध्यात्म तरह तरह के प्रयोग करते करते, उन के लेख पब्लीश करते रहे । दुनिया भर के धर्मों को नकार दिये और सब के उपर सत्य को रख्खा, सत्य की खोज को रख्खा ।

 न्युयोर्क के एक न्युरोपेथोलोजिस्ट डोक्टरने आरोप लगाया की ये काले जादु करनेवाली गेंग फ्रोड है । ग्लोबलिस्टों का ध्यान इस गेंग पर गया । उन लोगों के सारे लेख सारा काम पब्लिश करने में मदद की । पूरे न्युयोर्क शहर में नाम हो गया । हेलेना को आर्थिक सुरक्षा की जरूरत थी । ओल्कोटो नही दे सकता था, उसे पत्नि और दो बच्चे थे । उस के ग्रुप में बेटनेली था, उसने प्रस्ताव रख्खा शादी का । एप्रिल १८७५ में शादी कर ली । ओल्कोट को बताया नही था, जब उसे पता चला तो कहा “ये तो पागलपन है” । उसने हेलेना को फटकार लगाई, “अपने बच्चे की आयु के और कई गुना कम मेन्टल केपिसिटी वाले आदमी से शादी करना मुर्खता है” ।

 ओल्कोट, नंगे सत्य की खोज में एक भटका हुआ वकिल, हेलेना, चारित्र से ही नंगी जादु टोने करनेवाली महिला, विलियम, बेन्कर माफिया का आदमी जो इन दो प्यादों की मदद से दुनिया की जनता का दिमाग घुमाने के लिये निकल पडा मेसोन । इन सब ने १८७५ में थियोसोफिकल सोसाईटी की स्थापना की । ये एक मिरेकल क्लब था । गोपनियता की पोलिसी बनाई गई, एक दूसरे मेम्बर को पहचानने के लिए सिक्रिट सिम्बोल का उपयोग किया । प्रत्येक सदस्य अपने नाम के बाद FTS  (फैलो, थियोसोफिकल सोसायटी)  लिखने लगे ।

 स्थापना के बाद थियोसोफिकल सोसाईटी ने बौद्ध धर्म के स्वेच्छाचार के गूढ़ रहस्य और प्रकृति के नियमों और आदमी में अव्यक्त दिव्य शक्तियों की जांच करने में जुट गई । जो नतिजा मिला, जो थियरी बनाई गई उस के लिए दावा किया गया ये सब तो गुप्त महात्माओं के निर्देश है । माना जाता है की महात्माओं के सबूत खूद हेलिनाके तिबेटवास के दरम्यान उस के प्रेमी रहे लामा थे या हेलेना ने खूद लिखे थे । महात्माओं के पत्रों को दिखाकर हेलीना ने अपने आप को सही ठहरा दिया, वो जो करती है सब सही है । इन पत्रों के बारे मे, पक्ष में और विरोध में मिडिया में काफी चर्चा हुई । Who Wrote the Mahatmas Letters नाम की किताब भी छपी ।     

  १८७८ मे हेलेना रसिया की प्रथम महिला अमरिका की सिटीजन बनी । ऐसा इस लिए किया गया ताकी वो रसियन है वो बात खूल जाती तो जासूस होने का आरोप लग सकता था । उसी साल हेलेना और ओल्कोट भारत का कल्याण करने के लिए भारत आये । वो कल्याण आज हम भुगत रहे हैं ।  

 हेलिना को भारतमें मेसोनिक बेन्कर माफियाओं के इशारे, उनके प्लान के अनुसार काफी समर्थक मिल गये । समर्थकों में प्रमुख था एलन ओ. ह्युम, यहुदियों की मूल संस्था वर्ल्ड कोंग्रेस की भारत ब्रांच का स्थापक, आल्फ्रेड सिनेट, ध पायोनियर का एडिटर, गोरे और काले अधिकारी वर्ग और भारत के विभिन्न जाती के धनवान धनपति । महात्माओं के पत्र का नाटक यहां भी नही थमा । दावा किया गया की भारत के दो साधक कूट हुमी और मोर्य ने थियोसोफिकल सोसाईटी की रचना में बहुत मदद की है और उन के पत्र सिनेट और ह्युम को दिखाये गये । हस्ताक्षर से पता चल गया की ये मेडम हेलिनाने लिखा है, विवाद होने से पहले बात दब गई ।  

१८८२ मे सोसाईटी का हेडक्वोर्टर मद्रास के पास अद्यार में ले जाया गया । १८८४ मे हेलेना और ओल्कोट युरोप की टूर पर गये तो अमरिका में हेलेना के लिखे पत्र छापे गये जीस में मंदिर के संचालन के लिए नियुकत रहस्यमय काली पेनल के लिए निर्देश थे । हेलेना का भांडा फोडने के लिए उस पत्र को छापा गया था । साईकीकल रिसर्च सोसाईटी का रिचार्ड होड्गसन तपास करने के लिए अद्यार पहुंच गया । उसने हेलेना और सहयोगीयों पर धोखाघडी और ठगी का आरोप लगाते कटु रिपोर्ट जारी किया । बाद में ये रिपोर्ट १०० साल तक विवादित रहा था । हेलेना और सोसाईटी पर अंधेरा छा गया । विवाद के कारण आखीर ओल्कोट ने १८८५ में हेलेना को युरोप भेज दिया, अलग अलग देश में रही अंतमें तबियत खराब होने पर जर्मनी में सेटल हुई । हजार तरह की बिमारी ने घेर लिया और १८९१ अपने घर में ही मर गई ।

 थियोसोफिकल सोसाईटी के काम की जीम्मेदारी एक्टिविस्ट एनी वूड बेसेन्टने ले ली । एनी बेसेन्ट का घर की हेडक्वोर्टर बन गया । नई पिढी के उदारमतवादी बुध्धिजीवियों को सोसाईटी में जोडने के लिए बहुत मेहनत की । १९०७ में ओल्कोट मर गया तो वो सोसाईटी की प्रमुख बन गई ।  

 थियोसोफिकल सोसाईटी का असली बोधपाठ तो किसी को पता नही होता सिनियर मेंम्बर के सिवा । फिर भी इस बात को जनता के सामने रख्खी है । ब्रह्मांड और मानव के बीच का गुप्त रिश्ता मुख्य तीन बात पर आधारित है ।  

(१)  आखरी सत्य, एक सर्वव्यापी रूप में सिध्धांत विचारों से परे है ।

(२)  कुदरत में सर्वव्यापी चक्र (सायकल ) का कानून । (युग )

(३)  ब्रह्मांड में रहे सभी आत्मा की पहचान, अगर पुनर्जन्म है तो उस का सफर, चक्रिय और कार्मिक कानून से होती है ।  

ये सारी बातें जनता को उल्लु बनाने के लिए थी ऐसा ही लगता है, जुठे लोग और सत्य की बातें ?

 ये गन्दगी सिर्फ भारतमें ही नही फैली दुनिया के दूसरे देशों मे भी फैल गई ।

Madame Helena Petrovna Blavatsky, Annie Besant, Alice Bailey, Edgar Casey, Alister Crowley, Benjamin Creme—are the founders and perpetrators of today’s New Age Movement, false messiahs, antichrist hoaxes, and, in general, a whole lot of gibberish, deception and distraction. 

 ये एक इसाई की लिखी बात है, उसे एन्टीक्राईस्ट लगा, मुझे हुन्दु विरोधी लगता है । न्यु एज मूवमेन्ट देश विदेश सब जगह फैल गई । हिन्दु के ही युग सतयुग कलयुग और प्रलय का आधार लिया । प्रलय के बाद सतयुग = न्यु एइज, गोल्डन एइज आयेगा । आत्मा और परमात्मा को जाननेवाला ही बचेगा बाकी सबको मरना है । मानसिक रूप से जगत के नागरिकों को मरने के लिए तैयार करना था और हकिकत में बेंकर माफिया यहुदियों का असली एजन्डा “न्यु वर्ल्ड ओर्डर” और उस के लिए डिपोप्युलेशन एजन्डा नंबर-२१ का कातिल हथियार चले तो उस पर किसी का ध्यान ना जाये और नागरिकों में उस का सामना करने की ताकत ना बचे । जगत के धर्मों को तोडने का उनका सपना भी पूरा होता था, ४०० साल से चलाया हुआ सेक्युलरीजम भी बडी तिव्रता से मजबूत होता था । 

  Beware of the New Age Movement

http://israelsmessiah.com/religions/new_age.htm

उन के लॉगो का सुत्र है सत्य सभी धर्मों के उपर है । कौन सा सत्य ? इन जुठे और चारित्र हीन लोगों का सत्य । ऐसे ही एक सत्य के पूजारी ने भारत देश को बरबाद कर दिया आबाद होने से पहले । एलन ओ. ह्युम के संगत में कौन से, कितने कोंग्रेसी इसमें फंसे होन्गे एक कल्पना का विषय है क्यों की इस सोसाईटी की स्थापना के १० साल बाद इस आदमी ने यहुदियो की बहुमुखी संस्था वर्ल्ड कोंग्रेस की दुनिया के देशों पर राज्य करने की विंग की एक शाखा भारतमें भी खोल दी थी । और बाद में एनी बीसेन्ट भी तो भारत में हाजिर हो गई थी ।  

 एनी बीसेन्ट की उलुल जुलुल हरकतों से तंग आकर उस के पति फ्रेन्क बिसेन्ट ने उसे भगा दिया । उस के बेटे की कस्टडी उस के पति को मिली और बेटी उसे मिली । वो चार्ल्स ब्रेडलेफ नाम के जोलाछाप डोक्टर के चक्कर में पड गाई । उस जमाने में बढती आबादी का कोइ प्रोब्लेम नही था पर ये दोनो बर्थ कंट्रोल की मुवमेंट करने लगे । उन की मुवमेंट से ही वो दोनो समाज के लिए नंगे हो गये थे उपर से डोक्टर साहब सिर्फ १४ विक मेडिसिन के क्लास कर के एक महिला का गेर कानूनी ओपरेशन कर दिया । उस जुर्म में जेल चले गये । जेलमें उसने शरीर, आत्मा और धर्म का चिन्तन कर के ड्युअल (dualism ) थियरी खोज ली । उसकी ड्युअल थियरी कुछ भी हो लेकिन हमारे सामने उसका परिणाम है सेक्युलर जनता और उनका डबल स्टान्डर्ड के रूप मे । कहना कुछ करना कुछ, बिलकुल नंगापन । धर्म की बात नही, धर्म की बात नही करते करते उनकी सुई धर्म पर ही अटक जाती है । करना है हर काम धर्म आधारित, पर बोलना है सेक्युलरों की जै हो !   

 ग्लोबल माफियाओं ने ब्रिटीश साम्राज्य को खतम करने के लिए इस मॅडम को भारत के क्रांतिकारियों की मदद के लिए भारत भेजा और १९१७ में कोंग्रेस की पहली महिला प्रमुख बनाया, और वो सच्चे दिल से अपने ही देश के अंग्रेजों से लडी । हुआ ना डबल स्टाम्डर्ड !! डबल भी नही, ट्रिपल । असली आजादी के क्रांतिविरों की अवहेलना कर के टटपूंजिए हलकट नकली क्रांतिविरों को अपने चेले बना कर सेक्युलरी घुटी पीला कर उन को बढावा देती रही । 

 गांधीवादी मुझे माफ करे ये कडवा घुंट पिला रहा हुं ।

गांधी जनम से ही विद्रोही स्वभाव के थे । जब वो लंडन पढने गये तो थियोसोफिकल सोसाईटी के चक्कर में फंस गये । बेसेन्ट भी उस समय वहां पर ही थी । गांधी को गीता पढने के लिए दी गई । गांघी को धर्म में कोइ रुची नही थी लेकिन वो गीता अच्छी लगी तो पढने लगे और पूरी जीन्दगी उस का अनुसरण भी किया । केथरिन टिड्रिक का कहना था की वो गीता थियोसोफिकल थी । याने असली गीता नही थी । गांधीने जब जोहन्स्बर्ग में अपना ओफिस खोला तो दिवाल पर साम्यवादी टोल्टोय, जीसस क्राईस्ट और एनी बिसेन्ट की तस्विर लगाई थी । उस दौरान गांघी इसाई बन गये थे और लगे हाथ फ्रीमेसन भी बन गये थे । ये राज अभी २-४ साल से ही खूला है । १९०५ में गांघी ने एक पत्र द्वारा बीसेन्ट से अपनी श्रध्ध व्यक्त की थी । सत्याग्रह और बलिदान गांघी बिसेन्ट से सिखे थे, साम्यवादी लेखक लीओ टोल्स्टोय का भी असर था । गांधी चारों और से ग्लोबलिस्ट पाशवी प्रकृति के गुरुओं से घीर गये थे । सेक्युलरी वायरस गांधी के दिलो दिमाग में ऐसा घुसा दिया था जीस के कारण वो बुखार चढा की उस बूखार के कारण ही उसे मार दिया गया । नंगा सत्य के बारेमे सुना होगा लेकिन ये आदमी नंगा जुठ बोलता था । एक ही बात पांच भाषा की पत्रिका में लिखता था, अंग्रेजी भाषीयों के लिए अलग भारतिय भाषा के लिए अलग । अंग्रेजीमें जातपात और अस्पृष्यता का विरोध और गुजराती में समर्थन । एक समय मुसलमान का प्रेम उस हद तक बढ गया की अफघानिस्तान के शाह को न्योता दे दिया की आओ, भारत पर आक्रमण करो और भारत को जीत लो । कोइ नंगघडंग ही अपने देश पर आक्रमण करवा सकता है । गान्घी का + कोंग्रेस का + हर सेक्युलरका पार्टीयों का + मिडिया का + सेक्युलर जनता का + अमेरिका का + युरोप का मुस्लिम प्रेम = युनो का डिपोप्युलेशन एजन्डा नंबर -२१ । युरोप और अमरिका में मुस्लिम का सशक्तिकरण हो रहा है, इसाई और दूसरी कोम घबरा रही है । मिडल इस्ट और आफ्रिका के देशों में, जहां कट्टरवाद नही था, उन देशों में यहुदियों के ही पाले हुए मुस्लिमब्रधरहूड को सत्ता पर लाने की कोशीश हो रही है, जो सिधे ही शरिया कानून की बात करता है । इजिप्त को देख लो आज, सेना इन अमरिकी पिट्टओं का सामना कर रही है । यहुदी माफियाओं ने उस प्रजामें ऐसा पागलपन देख लिया की उनका साडे छ अरब जनता को मारने के प्लान में उस प्रजा को सुपारी किलर की तरह उपयोग कर रहे हैं । जब आबादी कम हो जायेगी तो उसे भी मारने में देर कितनी । नाटो और ड्रोन किस काम के ?  

 एनी बिसेन्ट के सिखाये हुए ब्रह्मचर्य के प्रयोग भारतिय दर्शन के नही थे, विलपावर बढाने के लिए थे । एक नंगा आदमी नंगी महिलाओं के बीचमें सोने पर भी वासना नही जगनी चाहिए । नारी तन का आकर्षण और मन की द्र्ढता में मन ही जीतना चाहिए । ये कसरत है नकली स्पिरिच्युल साधकों की । ये पाशवी प्रयोग थे, काले जादु की तरह । ये प्रयोग नही, दिनचर्या थी, विलपावर तो हररोज चार्ज करना पडता है शैतानों को । दूसरा उनका दिव्य प्रेम, वासना पूर्ति के लिए कोइ भी चलता है, नर नारी कोइ भी । गांघी को गे बतानेवाली किताब बहुत चर्चा मे आई थी । जगत गांघी को नंगा नही देख पाया उस लेखक को जुठा कहा लेकिन अब सबूत भी सामने आ गये हैं, वो लेखक सही था । लेखकने बताया हुआ गांघी का यहुदी प्रेमी, जो एक बोडीबिल्डर था वो खूद फोटो के साथ सामने आ गया है ।

ईस प्रेमी युगल के पेमपत्र ७ लाख पाउंड में भारत सरकार ने खरीद लीए हैं और दिल्लीमें प्रदर्शनी भी रख्खी थी । 

  A year after a controversial biography of Mahatma Gandhi claimed he was bisexual and left his wife to live with a German-Jewish bodybuilder, the Indian government has bought a collection of letters between the two men days before they were to be auctioned.

 India paid around £700,000 (60million rupees) for the papers, which cover Gandhi’s time in South Africa, his return to India and his contentious relationship with his family.

 पूरा पढना हो तो नीचे लिंक है ।

http://www.dailymail.co.uk/news/article-2172967/Indian-government-spends-700-000-buy-letters-prove-national-hero-Gandhi-gay.html 

http://www.youtube.com/watch?v=uRV8PYDIa8I

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