Posted in February 2014

सेक्स से मानब भक्षण तक

जैसे जैसे अर्थव्यवस्था विकसती गई धन्नासेठ धनपति ( इल्ल्युमिनिटी ) मानजात को कंट्रोल करने लगे । उनका सपना पूरी दुनिया पर राज करने का था आज लगभग पूरा होने के करीब है । पूरा और ओफिसियल राज अपने हाथमें तभी ले सकते हैं जब पूरी दुनिया की जनता एक अबोध जानवर बन जाये और आबादी … Continue reading

शेइम शेइम, कुछ तो शरम करो !

जब बच्चे चड्डी नही पहनने की जिद करते हैं तो माबाप या बडे भाई बहन “शेइम शेइम” बोलते हैं तो बच्चा चडी पहन लेता है । बच्चों में इतनी तो शरम होती है, बडे शरम छोड रहे हैं ।  मानवता के दुश्मनों ने दुनिया में “शैइमलेस सोसाईएटी” बनाने की ठानी हुई है, प्रजा को “शेइम … Continue reading

घोटाला है भाई घोटाला !

घोटाला है भाई घोटाला ! ये नारा कोइ मजाक तो नही । नागरिकों की खून पसीने की कमाई की लूट है, वो मजाक कैसे हो सकता है । लेकिन न्यायतंत्र इसे मजाक में लेता है । छोटा चोर चोरी करता है तो पकडेजाने पर चोरी का माल पूरा रिकवर किया जाता है और जीसका माल … Continue reading

सरदार की आम की टोकरी

दोनों विश्वयुध्ध के दौरान विश्व की जनता का असंतोष, गुस्सा बढते देख बेंकर माफिया यहुदियों ने दुनिया पर राज करने का अपना पैंतरा बदला । उन के प्यादे अंग्रेज, डच, फ्रेंच जहां भी गुलाम देशों में राज करते वो सब देशों की जनता के लिये दुश्मन बन गये थे । उन को वापस खिंच लिया … Continue reading

आतंकवादी बेन्कर्स रूस में

दोस्तो, जुठ बोलने की आदतवाले इतिहासकार हमे क्या क्या जुठ बताते रहते हैं उस की कोइ सीमा नही है । जो पढाया गया वो भी इतिहास ही था और जो लिख रहा हुं ये भी इतिहास ही है, पढनेवाले की विवेकबुध्धि पर है वो किस तरह लेते हैं । हमे बताया गया की रसियन क्रान्ति … Continue reading

आज का कर्ण गार्डी साहब

गरीबों की असली बेन्क दिपचन्दभाई गार्डी अब नही रहे, उनको को मेरा नमन और हार्दिक श्रध्धांजली । ————————————————————————– पहले हररोज का एक एक लाख दान करने का नियम था । आज की तारीख में मेहंगाई बढ जाने की वजह से हररोज एक करोड का दान देने का नियम बनाना पडा । उनकी बनाई स्कूलें और … Continue reading

क्यों मजाक करते हो साहब, इस गरीब की !

सालों से हम सुनते आये हैं गरीबी हटाओ ! गरीबी ह्टाओ !! क्या हम बेवकुफ है ? नही । हम जानते हैं गरीबों की कितनी डिमान्ड है । सब जगह गरीब चाहिए, सब को जरूरत है ईन की । ईसे कौन हटाना चाहेगा ? कुछ महिने पहले लोग मेरे एक दोस्त पद्मनाभ के पिछे पड … Continue reading

सुअर की औलाद

सुअर की औलाद क्यों लिखा ?  बचपन से ही धर्मेन्द्र मेरे आदर्ष हिरो रहे हैं । गुन्डों के साथ लडते समय उनको गुस्सा आता था तो ऐसा कुछ बोलते थे, मुझे खाली याद ही है जीवनमें नही उतारा है । फिर भी ऐसा लिखना पडा । आप को भी समज में आ जायेगा कि क्यों … Continue reading